Health Insurance Claims in India
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Official Website 1. ध्यान रखने योग्य बातें
- इलाज वाले दिन पॉलिसी एक्टिव होनी चाहिए और लाभार्थी के रूप में मरीज का नाम दर्ज होना चाहिए।
- इलाज मेडिकल तौर पर ज़रूरी हो और पॉलिसी में कवर हो, यह इन-पेशेंट, डे-केयर, या अगर पॉलिसी में हो तो घर पर इलाज भी हो सकता है।
- कैशलेस (नेटवर्क अस्पताल)
- नेटवर्क अस्पताल जाएँ और अपना ई-कार्ड/आईडी दिखाएँ।
- अस्पताल प्री-ऑथराइज़ेशन भेजता है; बीमाकर्ता को 1 घंटे के भीतर जवाब देना चाहिए।
- डिस्चार्ज के वक्त 3 घंटे में फाइनल ओके जरूरी है। इससे ज्यादा देर पर जो भी अतिरिक्त शुल्क होगा, वह बीमा कंपनी देगी।
- रीइम्बर्समेंट (नॉन-नेटवर्क अस्पताल)
- इलाज कराएँ और बिल का भुगतान करें।
- बीमा कंपनी को तुरंत सूचित करें।
- आपकी सूचना के बाद बीमा कंपनी/TPA आवश्यक दस्तावेज़ अस्पताल से एकत्र करता है मेडिकल पेपर्स के लिए आपको दौड़-भाग नहीं करनी चाहिए।
2. आवश्यक दस्तावेज़
1. पहचान, पॉलिसी, बैंक
- बीमा क्लेम फ़ॉर्म (भरें और साइन करें.) ।
- पॉलिसी का सबूत: ई-कार्ड/पॉलिसी कॉपी, पॉलिसी नंबर ।
- KYC: आधार/अन्य फोटो आईडी, पैन (यदि माँगा जाए),पते का कागज़।
- NEFT के लिए बैंक प्रमाण: प्रिंटेड नाम वाला कैंसिल्ड चेक या पासबुक का पहला पेज या नया बैंक स्टेटमेंट ।
2.अस्पताल और उपचार से जुड़े सबूत/दस्तावेज़
- डॉक्टर की भर्ती/डे-केयर की सलाह वाली पर्ची ।
- डिस्चार्ज /डे-केयर/ट्रांसफर की रिपोर्ट ।
- दिए गए सारे पैसे की रसीदें: एडवांस, डिपॉज़िट, फाइनल ।
- वार्ड रिकॉर्ड की कॉपी दें, जिसमें नर्सिंग चार्ट, वाइटल चार्ट, इलाज के नोट्स और ऑपरेशन नोट्स शामिल हों।
- इन सभी जांच रिपोर्टों की कॉपी दें (लैब, इमेजिंग, ECG आदि), संबंधित डॉक्टर की पर्ची और उनकी बिल/रसीदों के साथ।
- दवाई का बिल और उसी दवाई की डॉक्टर की पर्ची साथ लगाएँ.
- अगर इम्प्लांट/डिवाइस का इस्तेमाल हो तो स्टिकर और रसीद जमा करें.
- अगर सर्जरी हुई हो, तो ऑपरेशन से पहले और बाद की रिपोर्टें दें.
3. अलग स्थिति
- दुर्घटना मामलों में FIR/MLC + डॉक्टर का सर्टिफिकेट (कारण व समय) आवश्यक.
- अस्पताल में मौत होने पर डेथ समरी और डेथ सर्टिफिकेट दें।
- दूसरी पॉलिसियों की कॉपी/डिटेल तैयार रखें, ज़रूरत पर जमा कर।
4. कैशलेस vs. रीइम्बर्समेंट
- कैशलेस: अस्पताल मंज़ूरी और फाइनल बिल सीधे बीमा/TPA को भेजता है,अपनी ID और पॉलिसी की कॉपी साथ रखें, और भर्ती व डिस्चार्ज पर आवश्यक फॉर्म पर साइन करें।
- रीइम्बर्समेंट (नॉन-नेटवर्क/या कैशलेस अस्वीकार होने पर): आप अस्पताल का बिल पहले खुद भरते हैं, बीमा कंपनी/TPA को तुरंत बताएं और मेडिकल कागज़ अस्पताल से बीमा/TPA खुद लेता है, आपसे KYC और बैंक कागज़ माँगे तो जमा करें।
5. काम आने वाली बात
- जो भी कागज़ जमा करें या साइन करें, उसकी कॉपी अपने पास रखें ।
- तारीख और दवाई तीनों जगह मेल खाते हो- पर्ची, रिपोर्ट, बिल।
- ऐप/पोर्टल पर क्लेम स्टेटस देखते रहें और हर रसीद, टिकट नंबर और मैसेज की कॉपी सुरक्षित रखें।
3. क्लेम प्रक्रिया
1. कैशलेस क्लेम प्रक्रिया
- ज़रूरत के हिसाब से नेटवर्क अस्पताल चुनें:
- अपना e-कार्ड/पॉलिसी की कॉपी और फोटो ID साथ रखें।
- इलाज से पहले बीमा मंजूरी लें और जरूरत हो तो हॉस्पिटल में भर्ती हों.
- TPA डेस्क डॉक्टर के साइन के साथ आपकी बीमारी और अनुमानित खर्च बीमा/TPA को भेज देता है.
- बीमा कंपनी को 1 घंटे में फैसला देना चाहिए.
- डॉक्टर की बताई उपचार योजना अपनाएँ और सभी SMS/ईमेल संभालकर रखें।
- डिस्चार्ज की अनुमति
- अस्पताल जैसे ही डिस्चार्ज माँगे, 3 घंटे के अंदर OK आ जाना चाहिए।
- अगर 3 घंटे से ज़्यादा देर हो जाए,तो बढ़े हुए अस्पताल खर्च बीमा कंपनी देगी।
- मृत्यु होने पर क्लेम तुरंत प्रोसेस किया जाए।
- पेपर जमा और पैसे ट्रांसफर
- अस्पताल सारे कागज़ (समरी, बिल, रिपोर्ट) जोड़कर फाइनल पैक बीमा/TPA को भेजता है।
- बीमा कंपनी सीधे अस्पताल को पैसे देती है, आपको सिर्फ नॉन-पेयेबल चीज़ों का पैसा देना होता है (अगर हों)।
- दूसरी पॉलिसियों होने पर:
- आप किसी भी हेल्थ पॉलिसी को प्राइमरी चुन सकते हैं। प्राइमरी कंपनी बाकी कंपनियों से मिलकर बचा हुआ पैसा निपटाएगी।
2. रीइम्बर्समेंट क्लेम प्रक्रिया
- इलाज लें और बिल भरें:
- जरूरत हो तो भर्ती हों, इलाज करवाएँ, और अस्पताल का बिल चुका दें।
- डिस्चार्ज पर सभी बिल और रिपोर्ट्स पर अस्पताल की मुहर और हस्ताक्षर/साइन/दस्तख़त अवश्य कराएँ।
- बीमा कंपनी को तुरंत सूचित करें
- भर्ती के बाद या डिस्चार्ज के समय बीमा कंपनी /TPA को तुरंत सूचना दें, ऐप, पोर्टल, ईमेल, हेल्पलाइन या अस्पताल के TPA डेस्क का उपयोग करें।
- सूचना देने के सही रास्ते: ऐप/वेबसाइट, ईमेल, कॉल सेंटर, अस्पताल TPA.
- अस्पताल रिकॉर्ड जमा करना
- आपकी सूचना के बाद बीमा/TPA को जरूरी मेडिकल कागज़ सीधे अस्पताल से लेने चाहिए।
- रिकॉर्ड लेने के लिए अस्पताल के अलग-अलग काउंटरों पर आपकी दौड़-भाग नहीं होनी चाहिए।
- जो दस्तावेज़/कागज़ आपके पास हों, वे जमा करें
- बीमा क्लेम फ़ॉर्म (भरें और साइन करें.)
- पॉलिसी का सबूत: e-कार्ड या पॉलिसी की कॉपी, नंबर लिख, KYC: आधार/कोई फोटो ID, पैन अगर माँगें, पते का सबूत, NEFT पासबुक का पहला पेज या नया बैंक स्टेटमेंट।
- अस्पताल के कागज़ में डिस्चार्ज समरी, वार्ड फ़ाइलें, टेस्ट रिपोर्ट, डॉक्टर की पर्ची, दवाई का बिल, इम्प्लांट का स्टिकर/बिल, ऑपरेशन रिपोर्ट और उनके बिल दें.
- स्थिति की जाँच और निर्णय
- बीमा कंपनी जाँचेगी कि आपका क्लेम पॉलिसी के नियमों के मुताबिक है या नहीं.
- जाँच के बावजूद तय समय में फैसला करें, देरी पर RBI बैंक रेट के आधार पर नियम अनुसार से ब्याज देना होगा, जो आखिरी दस्तावेज़ मिलने से पेमेंट तक गिना जाएगा.
- भुगतान / राशि जमा
- क्लेम का पैसा NEFT से सीधे आपके बैंक खाते में आएगा ।
- बैंक की रसीद और बीमा कंपनी की सेटलमेंट लेटर सुरक्षित रखें।
4. शिकायत कैसे करें
- अपने बीमा कंपनी के Grievance Redressal Officer (GRO) को लिखित शिकायत भेजें और लिखित उत्तर माँगें।
- समाधान न मिले तो IGMS (Bima Bharosa) portal पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें या IRDAI से संपर्क करें:
Contact No.: 155255 or 18004254732
Email: complaints [at] irdai [dot] gov [dot] in - अगर क्लेम रिजेक्ट या कट हो, तो बीमा कंपनी को लिखित में साफ कारण देना होगा और कौन-सा पॉलिसी नियम लागू है यह भी बताना होगा।
शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया
- अपनी जानकारी भरें: नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल ।
- पता दर्ज करें: पूरा पता और पिन कोड लिखें।
To expand image - बीमा की जानकारी डालें: कंपनी नाम, पॉलिसी नंबर, कवर।
- मांगी गई जानकारी दें: अस्पताल, तारीख, क्लेम प्रकार।
To expand image - शिकायत/समस्या लिखें: 3–4 पंक्तियाँ, तारीख-रकम-रिफरेंस जोड़ें।
- दस्तावेज़/पेपर अपलोड करें: पॉलिसी/ID, बिल-रिपोर्ट, डिस्चार्ज समरी, बैंक प्रूफ।
- Register पर क्लिक करें और रेफरेंस नंबर सेव/लिख लें।
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